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हर चेहरे में छिपी कहानी: ‘HEADS’ प्रदर्शनी में कला, स्मृति और मानवीय संवेदना का संगम

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श्रीधराणी गैलरी में 17 से 23 सितंबर तक सजी समूह प्रदर्शनी, कलाकारों ने चेहरों के जरिए भावनाओं और रिश्तों को दिया आकार

‘Mother & Child’ से पार्वती-गणेश तक की कला यात्रा ने खींचा ध्यान, प्रदर्शनी की आय का एक हिस्सा कैंसर पीड़ितों की सहायता के लिए समर्पित

लोक भारती न्यूज ब्यूरो 

नई दिल्ली। चेहरे को कैनवास पर उतारना सिर्फ उसकी शक्ल को चित्रित करना नहीं है। हर चेहरे के पीछे भावनाएं, स्मृतियां और अनकही कहानियां होती हैं। इन्हीं भावनाओं को केंद्र में रखकर ‘HEADS — Every Face Holds a Story’ समूह प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। 17 से 23 सितंबर तक श्रीधराणी गैलरी, त्रिवेणी कला संगम में आयोजित इस प्रदर्शनी ने कला को मानवीय संवेदना और स्मृतियों से जोड़ने का अवसर दिया।

प्रदर्शनी स्वर्गीय डॉ. मंजित कोचर की स्मृति को समर्पित रही। आयोजन से जुड़े कलाकार के अनुभव के अनुसार, यह पहल केवल एक कला प्रदर्शनी नहीं थी, बल्कि ऐसी स्मृति और विरासत से जुड़ने का माध्यम बनी, जिसमें कला के साथ संवेदना और मानवीयता भी दिखाई दी।


मां की विरासत को सार्थक उद्देश्य से आगे बढ़ाने की पहल

प्रदर्शनी की एक खास बात यह रही कि डॉ. मंजित कोचर की बेटी अमृता कोचर ने अपनी मां की विरासत को सिर्फ यादों तक सीमित रखने के बजाय उसे एक सामाजिक उद्देश्य से जोड़ने की पहल की। प्रदर्शनी से प्राप्त आय का एक हिस्सा कैंसर पीड़ितों की सहायता के लिए समर्पित किया गया।

इस पहल ने कला आयोजन को सामाजिक सरोकार से भी जोड़ा। कला प्रेमियों के लिए यह प्रदर्शनी जहां रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच बनी, वहीं इससे जुड़ा सामाजिक उद्देश्य इसे और अर्थपूर्ण बनाता रहा।

‘Mother & Child’ से पार्वती-गणेश तक रिश्ते की कहानी

प्रदर्शनी में शामिल कलाकार के लिए ‘Mother & Child’ श्रृंखला लंबे समय से आत्मीय विषय रही है। कलाकार के मुताबिक, मां और बच्चे का रिश्ता सिर्फ मातृत्व का प्रतीक नहीं, बल्कि प्रेम, सुरक्षा, विश्वास और उस मौन जुड़ाव की कहानी है, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना मुश्किल है।

इसी भाव का विस्तार कलाकार की पार्वती-गणेश चित्र श्रृंखला में दिखाई देता है। कलाकार ने पारंपरिक धार्मिक छवि को दोहराने के बजाय पार्वती और गणेश को मां और बच्चे के मानवीय रिश्ते के रूप में देखने का प्रयास किया है।

कलाकार की दृष्टि में पार्वती सबसे पहले एक मां हैं—अपने बच्चे को थामे, उसकी रक्षा करती हुईं और उसे स्वीकार करती हुईं। वहीं गणेश इस रिश्ते में बच्चे की मासूमियत, विश्वास और निर्भरता का प्रतीक हैं।


भव्यता से ज्यादा मानवीय स्पर्श पर जोर

पार्वती-गणेश की रचनाओं में कलाकार ने रिश्ते को केवल भव्य या अलौकिक रूप देने के बजाय उसमें मानवीय स्पर्श बनाए रखने की कोशिश की है। मां की बाहों में सिमटा बच्चा, एक स्पर्श, एक नजर या शरीर की सहज मुद्रा जैसे छोटे-छोटे क्षण इस रिश्ते की गहराई को सामने लाते हैं।

कलाकार के अनुसार, ‘Mother & Child’ से ‘Parvati–Ganesh’ तक की यात्रा किसी नए विषय की शुरुआत नहीं, बल्कि उसी भाव की आगे बढ़ती कहानी है। एक जगह मां सामान्य रूप में दिखाई देती है और दूसरी जगह वही ममता पार्वती के रूप में सामने आती है।

अनजान दर्शकों से बना कला का रिश्ता

प्रदर्शनी के दौरान मित्रों और कला प्रेमियों के साथ ऐसे दर्शक भी पहुंचे, जिनसे कलाकार पहले परिचित नहीं थीं। कलाकार के अनुभव में इन दर्शकों का उनकी कला से जुड़ना प्रदर्शनी का खास अनुभव रहा।

कला की यही खूबसूरती है कि कलाकार अपने काम के जरिए ऐसे लोगों से भी संबंध बना सकता है, जिन्हें वह व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता। एक चित्र, एक भाव या एक कहानी दो अनजान लोगों के बीच संवाद का माध्यम बन सकती है।

स्मृति, कला और संवेदना का अनुभव बनी ‘HEADS’

‘HEADS — Every Face Holds a Story’ कलाकार के लिए सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं रही, बल्कि स्मृति, कला, संवेदना और मानवीय जुड़ाव का अनुभव बनी। कलाकार ने इस पहल का हिस्सा बनने के लिए अमृता कोचर और Nayan Naveli Gallery के प्रति आभार जताया।

स्वर्गीय डॉ. मंजित कोचर की स्मृति को समर्पित इस पहल के जरिए कला और मानवीय संवेदना को जोड़ने का प्रयास किया गया। कलाकार ने उम्मीद जताई कि यह प्रयास आगे भी कला के साथ सामाजिक संवेदना को जोड़ने की दिशा में काम करता रहेगा।

 

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